छत्तीसगढ़ सरकार की कड़ी निगरानी, मरीजों के हक पर नहीं होने देंगे कुठाराघात
रायपुर, 10 फरवरी 2025: छत्तीसगढ़ सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना में फर्जी दावों पर सख्त कार्रवाई करते हुए 28 अस्पतालों की जांच कराई, जिसमें भारी अनियमितताएँ सामने आईं। इसके तहत 15 अस्पतालों का पंजीयन एक वर्ष के लिए रद्द कर दिया गया, 4 अस्पतालों को छह महीने के लिए निलंबित किया गया, 4 अस्पतालों को तीन महीने के लिए निलंबित किया गया और 5 अस्पतालों को चेतावनी पत्र जारी किया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता के लिए राज्य सरकार की सख्त नीति
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) की नेशनल एंटी-फ्रॉड यूनिट (NAFU) समय-समय पर संदेहास्पद दावों की जांच के लिए ट्रिगर जारी करती है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार ने विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। राज्य नोडल एजेंसी द्वारा संदेहास्पद अस्पतालों की पहचान की गई और विशेष बैठक कर जिला एवं राज्य स्तरीय अधिकारियों की निगरानी में गहन निरीक्षण अभियान चलाया गया। रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में दो अस्पतालों की प्रतिदिन भौतिक जांच की गई।
जांच के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ सामने आईं, जिसके बाद सभी 28 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उचित जवाब न मिलने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की गई।
“जनता की सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस कड़ी कार्रवाई पर कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
“आयुष्मान योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना का मुख्य उद्देश्य हर नागरिक को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। जो भी अस्पताल इस पवित्र योजना में गड़बड़ी करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी सरकार की पारदर्शी स्वास्थ्य नीति पर जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इस योजना का लाभ केवल पात्र लाभार्थियों को ही मिले।
“जो भी अस्पताल नियमों का उल्लंघन करेगा, उसे कड़ी सजा मिलेगी। सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ इस योजना को लागू कर रही है और भविष्य में भी इस तरह की सख्त जांच जारी रहेगी।”
छत्तीसगढ़ सरकार की चौंकस निगरानी, चुनावी साल में जनता को मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य लाभ
चुनावी वर्ष में सरकार की इस कार्रवाई को जनता के हित में बड़ी पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में अन्य जिलों में भी इसी तरह के निरीक्षण किए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बनी रहे। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति ने यह साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।
छत्तीसगढ़ की जनता सरकार के इस कदम का स्वागत कर रही है और आने वाले चुनावों में सुशासन की इस नीति को एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा सकता है।

