3200 करोड़ के शराब घोटाले का खुलासा: छत्तीसगढ़ में बगैर इनवॉइस 66 लाख पेटियां बेची गईं, 29 अधिकारी आरोपी

3200 करोड़ के शराब घोटाले का खुलासा: छत्तीसगढ़ में बगैर इनवॉइस 66 लाख पेटियां बेची गईं, 29 अधिकारी आरोपी
छत्तीसगढ़ ₹3200 करोड़ शराब घोटाला – विस्तृत रिपोर्ट | B4News

छत्तीसगढ़ में ₹3200 करोड़ का शराब घोटाला: पूरी कहानी विस्तार से

रायपुर | एक्सक्लूसिव रिपोर्ट | B4News

आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने राज्य के 29 आबकारी अधिकारियों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। घोटाले की राशि अब ₹3200 करोड़ तक पहुंच चुकी है। चौथा चालान 2100 पन्नों का है, जिसमें बिना ड्यूटी बेची गई शराब की जानकारी और भ्रष्ट अधिकारियों की भूमिका उजागर हुई है।

➡️ शराब कैसे बेची गई बिना इनवॉइस?

आबकारी अधिकारियों ने एक समानांतर तंत्र तैयार किया था जिसे ‘B-Part शराब तंत्र’ कहा गया। इसमें सरकारी शराब दुकानों से शराब बेची गई लेकिन उसका कोई वैधानिक रिकॉर्ड या इनवॉइस नहीं बनाया गया। इससे न केवल सरकार को कर (ड्यूटी) का नुकसान हुआ बल्कि अधिकारियों ने भारी व्यक्तिगत लाभ भी कमाया।

🚩 मुख्य तथ्य जो सामने आए

  • ₹2174 करोड़ की शराब बेची गई बिना ड्यूटी और इनवॉइस के।
  • 15 जिलों में 29 आबकारी अधिकारी इसमें संलिप्त पाए गए।
  • 66 लाख पेटियां बेची गईं बिना कोई वैध दस्तावेज दिए।
  • अधिकारियों की व्यक्तिगत कमाई 1 से 11 करोड़ तक हुई।
  • चालान में 138 पेज की समरी और 227 गवाहों की गवाही शामिल है।

🎯 बी-पार्ट शराब क्या होती है?

बी-पार्ट शराब वह शराब है जो सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दुकानों पर बेची जाती है, लेकिन उस पर कोई वैध रसीद या इनवॉइस नहीं होता। इसमें नकली होलोग्राम और बिना टैक्स के शराब बेची जाती है। यह तरीका राजस्व चोरी और भ्रष्टाचार का प्रमुख हथियार बना।

🧠 कौन हैं इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड?

जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे तंत्र का संचालन पूर्व IAS अधिकारी अनिल टूटेजा, व्यापारी अनवर ढेबर, और तत्कालीन आबकारी सचिव अरुणपति त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस घोटाले की ज़मीनी स्तर पर योजना और वितरण जनार्दन कौरव और नितिन खंडूजा के जिम्मे था।

👤 जनार्दन कौरव: तंत्र का तकनीकी विशेषज्ञ

जनार्दन कौरव ने 64 डिस्टलरियों से बी-पार्ट शराब को अवैध तरीके से सरकारी दुकानों तक पहुंचाया। वह जिलावार गाड़ियों की योजना बनाता, रिपोर्ट सीधे त्रिपाठी को भेजता और नकली होलोग्राम की आपूर्ति करता था। उसे प्रमोट करने के बाद भी उसी पद पर बनाए रखा गया, जिससे शक और गहरा हो गया।

💸 इकबाल खान की भूमिका

इकबाल खान, जो रायपुर में सहायक जिला आबकारी अधिकारी और बाद में उड़नदस्ता प्रभारी रहे, ने नवापारा, मंदिरहसौद जैसे हाई सेलिंग ज़ोन में बी-पार्ट शराब की बिक्री का पूरा लेखा-जोखा संभाला। अनवर ढेबर की सिफारिश पर उनकी पोस्टिंग हुई थी और वह पैसे को विकास अग्रवाल तक पहुंचाते थे।

🏘️ संपत्ति और राजनीतिक कनेक्शन

दुर्ग के एक प्रभावशाली नेता को हर महीने ₹10 करोड़ की राशि भेजे जाने की जानकारी भी चालान में सामने आई है। आरोपी अधिकारियों के पास करोड़ों की बेनामी संपत्तियां, आलिशान बंगले, जमीनें और गहने पाए गए हैं जिन्हें जब्त करने की कार्रवाई जारी है।

“यह घोटाला छत्तीसगढ़ की जनता के विश्वास को तोड़ने वाला है और दोषियों को कानून के कठोरतम दंड मिलने चाहिए।” – B4News संपादकीय टीम

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