मीडिया सम्मान परिवार ने जारी किया सार्वजनिक पत्र, कहा— अब चुप्पी नहीं
पत्रकारों के अपमान को माना जाएगा लोकतंत्र और किसानों की आवाज़ पर हमला
रायपुर | छत्तीसगढ़ | विशेष रिपोर्ट | B4News
छत्तीसगढ़ प्रदेश की धान समितियों में पत्रकारों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार, धमकी और रिपोर्टिंग में बाधा को लेकर मीडिया सम्मान परिवार, छत्तीसगढ़ ने एक सार्वजनिक चेतावनी पत्र जारी किया है। इस पत्र में साफ शब्दों में कहा गया है कि अब पत्रकारों के अपमान और उत्पीड़न को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह पत्र किसी एक समिति, व्यक्ति या जिले के लिए नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को आईना दिखाने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
लगातार मिल रही हैं शिकायतें, सिस्टम पर उठे सवाल
पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्रदेश के विभिन्न ग्राम, जनपद, जिला और संभाग स्तर की धान समितियों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जहाँ—
- पत्रकारों के साथ बदसलूकी की जा रही है
- अपमानजनक भाषा का प्रयोग हो रहा है
- धमकी देकर रिपोर्टिंग रोकी जा रही है
- किसानों से जुड़े मुद्दों को दबाने की कोशिश हो रही है
मीडिया सम्मान परिवार ने इसे केवल पत्रकारों का नहीं, बल्कि किसानों की आवाज़, लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला बताया है।
“पत्रकार सवाल पूछने का अपराध नहीं कर रहे”
सार्वजनिक पत्र में समिति प्रबंधकों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा गया है—
“पत्रकार आपके निजी दुश्मन नहीं हैं।
वे सवाल पूछने का अपराध नहीं कर रहे,
बल्कि किसानों के साथ हो रहे व्यवहार को समाज के सामने ला रहे हैं।”
पत्र में यह सवाल भी उठाया गया है कि—
यदि धान समितियों का कार्य पारदर्शी और नियमों के अनुसार है, तो कैमरे और सवालों से डर क्यों?
पत्रकार की पहचान पर भ्रम फैलाना गलत
पत्र में पत्रकारों की पहचान को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर भी तीखा प्रहार किया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि—
- छत्तीसगढ़ का जनसंपर्क विभाग किसी को पत्रकार होने का प्रमाण पत्र जारी नहीं करता
- आज हर नागरिक के पास कैमरा है और हर नागरिक को सवाल पूछने का अधिकार है
- कोई भी समिति प्रबंधक किसी पत्रकार को रिपोर्टिंग से रोकने, धमकाने या कैमरा छीनने का अधिकार नहीं रखता
खुली चेतावनी: अगली घटना अब निजी नहीं मानी जाएगी
मीडिया सम्मान परिवार ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी भी धान समिति में—
- पत्रकार से गाली-गलौच
- मोबाइल या कैमरा छीनना
- रिपोर्टिंग में बाधा
- धमकी या धक्का-मुक्की
- “विज्ञापन बंद करा देंगे” जैसी बातें
की गईं, तो इसे—
- लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन
- प्रेस स्वतंत्रता पर हमला
- किसानों की आवाज़ दबाने की साजिश
माना जाएगा।
हर घटना होगी सार्वजनिक, कानूनी कार्रवाई तय
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ऐसी किसी भी घटना की स्थिति में—
- दोषियों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे
- वीडियो और साक्ष्य सामने लाए जाएंगे
- जिला, संभाग और राज्य स्तर पर शिकायतें दर्ज होंगी
- आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी
मीडिया सम्मान परिवार ने दो टूक कहा है कि अब किसी भी तरह की चुप्पी नहीं बरती जाएगी।
विज्ञापन को लेकर भ्रम भी किया गया दूर
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि—
- किसी समिति का किसी मीडिया संस्थान को विज्ञापन देना या न देना उसका अधिकार है
- लेकिन विज्ञापन के नाम पर पत्रकार को अपमानित करना या डराना कानूनन अपराध है
पत्रकार और समिति प्रबंधक दोनों अपने-अपने दायित्वों के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन स्वतंत्रता का अर्थ अराजकता नहीं होता।
“हम टकराव नहीं, सम्मान और पारदर्शिता चाहते हैं”
पत्र के अंत में मीडिया सम्मान परिवार ने कहा है—
“हम टकराव नहीं चाहते,
हम हिंसा नहीं चाहते,
हम सिर्फ सम्मान, संवाद और पारदर्शिता चाहते हैं।
लेकिन अगर पत्रकारों को कमजोर समझा गया,
तो यह सबसे बड़ी भूल होगी।”
इस सार्वजनिक पत्र को अंतिम शालीन चेतावनी बताते हुए कहा गया है कि इसके बाद हर घटना सार्वजनिक और कानूनी रूप लेगी।
