अवैध निर्माण को संरक्षण या सिस्टम की लाचारी? तीन नोटिस के बाद भी बुलडोजर खामोश!
रायपुर | B4News
राजधानी रायपुर में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक साठगांठ और नियमों की खुली अनदेखी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लालपुर स्थित ‘प्रोग्रेसिव पॉइंट’ की छत पर संचालित ‘टी.एच.डी. रेस्टोरेंट’ अब केवल एक रेस्टोरेंट नहीं, बल्कि नगर निगम की निष्क्रियता और प्रशासनिक ढिलाई का प्रतीक बन चुका है।
दस्तावेज साफ बताते हैं कि यह निर्माण अवैध है। नगर निगम के नोटिस इसकी पुष्टि करते हैं। शिकायतें लगातार दर्ज हैं। बावजूद इसके कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति होती रही और जमीनी स्तर पर बुलडोजर अब तक खामोश है।
कागजों में सख्ती, जमीन पर चुप्पी
नगर पालिक निगम रायपुर के जोन क्रमांक-10 द्वारा इस मामले में 19 फरवरी 2026 को पहला नोटिस जारी किया गया। इसके बाद 16 मार्च को दूसरा नोटिस और फिर 25 मार्च 2026 को ‘अंतिम नोटिस’ जारी कर स्पष्ट रूप से कहा गया कि नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 307(3) के तहत अवैध निर्माण को निगम स्वयं ध्वस्त करेगा और पूरा खर्च संबंधित संचालक से वसूला जाएगा।
लेकिन ‘अंतिम नोटिस’ की समयसीमा खत्म हुए कई सप्ताह बीत चुके हैं। न कोई कार्रवाई हुई, न ध्वस्तीकरण, न कोई जवाबदेही तय हुई।
अब सवाल यह है कि जब निगम के पास कानूनी अधिकार मौजूद हैं, तो फिर कार्रवाई आयुक्त की टेबल पर आकर क्यों रुक जाती है?
शिकायतकर्ता लड़ रहा, सिस्टम टाल रहा
इस पूरे मामले को उजागर करने वाले शिकायतकर्ता सोनू रेलवानी ने सितंबर 2025 से लगातार इस अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ यह बताया कि आवासीय एवं व्यावसायिक परिसर की छत का अवैध रूप से उपयोग कर रेस्टोरेंट संचालित किया जा रहा है, जिससे न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी खतरे में है।
बताया गया है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तथा नगर निगम से आवश्यक एनओसी (NOC) के बिना यह व्यवसाय संचालित हो रहा है। शिकायतकर्ता के पास प्रमाणों का अंबार है, लेकिन प्रशासन के पास केवल मौन।
क्या ‘कमीशन कनेक्शन’ ने रोक दिया बुलडोजर?
शहर में चर्चा है कि जब तक ‘ऊपरी सेटिंग’ मजबूत रहती है, तब तक अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं होती। यही वजह है कि आम नागरिक की छोटी सी निर्माण त्रुटि पर निगम तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन बहुमंजिला इमारत की छत पर बने आलीशान अवैध रेस्टोरेंट के सामने पूरा सिस्टम असहाय नजर आता है।
यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या संबंधित अधिकारियों को ‘मैनेज’ कर लिया गया है? क्या प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई रोकी जा रही है?
यदि ऐसा नहीं है, तो फिर तीन नोटिसों के बाद भी निगम की मशीनरी आखिर निष्क्रिय क्यों है?
सुरक्षा के साथ बड़ा खिलवाड़
छत पर अवैध रूप से संचालित ऐसे रेस्टोरेंट केवल राजस्व की चोरी नहीं करते, बल्कि अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के लिहाज से भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
यदि किसी दिन कोई अप्रिय घटना घटती है—आग, भगदड़ या संरचनात्मक हादसा—तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या नगर निगम और संबंधित अधिकारी तब भी सिर्फ नोटिस दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलेंगे?
आयुक्त से सीधा सवाल
यह मामला केवल एक अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम का है जो या तो दबाव में है, या फिर संरक्षण देने में सक्रिय।
यदि जल्द ही टी.एच.डी. रेस्टोरेंट पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह मानने में कोई संकोच नहीं रहेगा कि रायपुर नगर निगम अब नगर विकास नहीं, बल्कि अवैध कब्जाधारकों के संरक्षण का केंद्र बन चुका है।
हमारा सवाल सीधा है—आयुक्त महोदय, कार्रवाई कब होगी?
या फिर यह मान लिया जाए कि आपकी फाइलों की स्याही रसूखदारों के प्रभाव से सूख चुकी है?
