भूमि विवाद से आत्महत्या तक: आदिवासी कोरवा परिवार की लड़ाई में हाईकोर्ट से पहली जीत, मग्गू सेठ सहित छह की ज़मानत याचिका खारिज

भूमि विवाद से आत्महत्या तक: आदिवासी कोरवा परिवार की लड़ाई में हाईकोर्ट से पहली जीत, मग्गू सेठ सहित छह की ज़मानत याचिका खारिज
स्थान: राजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज
रिपोर्ट: B4News इन्वेस्टिगेशन डेस्क
तारीख: 13 जुलाई 2025

हाईकोर्ट का फैसला:

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने पहाड़ी कोरवा जनजाति से जुड़े भैराराम आत्महत्या मामले में दर्ज अपराध क्रमांक 103/2025 के तहत 6 अभियुक्तों की अग्रिम/नियमित ज़मानत याचिकाएँ खारिज कर दी हैं। न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल की एकलपीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा कि जांच अभी अधूरी है और प्रथम दृष्टया आरोपियों की भूमिका स्पष्ट है

जिनकी ज़मानत याचिकाएं खारिज हुईं:

  • विनोद कुमार अग्रवाल उर्फ मग्गू सेठ
  • प्रवीण अग्रवाल
  • दिलीप टिग्गा
  • चतुरगुण यादव
  • राजेन्द्र मिंज
  • धरमपाल कौशिक

मामले का पृष्ठभूमि:

पीड़िता जुबारो बाई की ज़मीन 18 नवंबर 2024 को धोखाधड़ीपूर्वक शिवराम के नाम पंजीकृत करवा दी गई। यह ज़मीन भैराराम के नाम पर संयुक्त खाता में दर्ज थी। रजिस्ट्री के पीछे कोई पारिवारिक सहमति या भुगतान नहीं किया गया। पीड़िता आदिवासी थी और दस्तावेजी प्रक्रिया को समझ पाने में असमर्थ थी।

मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या:

ज़मीन हड़पने के बाद मृतक भैराराम को बार-बार धमकाया गया, उसका पीछा किया गया और कहा गया कि “यह ज़मीन अब हमारी है”। यह मानसिक उत्पीड़न 21-22 अप्रैल 2025 की रात उसकी आत्महत्या का कारण बना।

“बापू का आत्मसम्मान छीन लिया था इन्होंने, अब जीवन भी छीन लिया।” – संत्राम (भैराराम का बेटा)

दर्ज अपराध:

अपराध क्रमांक 103/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 108, 3(5) एवं SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत केस दर्ज किया गया है। इससे पूर्व धोखाधड़ी का एक अन्य केस 23 अप्रैल को अपराध क्रमांक 90/2025 के रूप में दर्ज हुआ था।

राज्य की दलील:

उप-सरकार अधिवक्ता सुनीता मणिकपुरी ने दलील दी कि आरोपी प्रभावशाली हैं, और ज़मानत मिलने पर जांच को प्रभावित कर सकते हैं।

स्थानीय तंत्र में सांठगांठ के आरोप:

आरोपी विनोद अग्रवाल पर पहले से ही 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। स्थानीय स्तर पर नेताओं, अधिकारियों और दलालों के साथ गहरे संबंधों के चलते रिपोर्टिंग करने वालों को भी डराया गया है। एक पत्रकार ने गुमनाम रूप से बताया —

“अगर तुमने मग्गू सेठ का नाम लिया, तो तुम भी केस में घसीटे जाओगे।”

हाईकोर्ट की टिप्पणी:

न्यायालय ने कहा — “पुलिस जांच अभी अधूरी है, प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं। वर्तमान स्थिति में ज़मानत देना न्यायोचित नहीं होगा।” ट्रायल कोर्ट को आदेश की प्रति शीघ्र भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

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