‘मग्गू भाई’ का ऐसा भौकाल कि सिस्टम भी शरमा जाए!
रायपुर / बलरामपुर | B4News स्पेशल व्यंग्यात्मक रिपोर्ट
बलरामपुर में इन दिनों पत्थर नहीं, बल्कि कानून पिस रहा है।
और इस बार क्रशर की आवाज़ नहीं —
एक पत्रकार की चिट्ठी गूंज रही है, जिसकी गूँज राष्ट्रपति भवन तक पहुंच चुकी है।
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार जितेन्द्र द्वारा लिखी गई यह शिकायत नहीं,
बल्कि सिस्टम के मुंह पर मारा गया व्यंग्यात्मक आईना है।
निशाने पर हैं — विनोद अग्रवाल उर्फ ‘मग्गू सेठ’।
🔴 क्रशर कांड: मौत नहीं, मोक्ष है गुरु!
बरियों गांव के आदिवासी शिव नारायण की मौत को आप हादसा समझ रहे हैं?
पत्रकार के अनुसार यह सरासर नासमझी है।
पत्र में व्यंग्य करते हुए लिखा गया है कि —
मग्गू सेठ के क्रशर में मरना दुर्घटना नहीं, बल्कि सौभाग्य है।
यह सीधा स्वर्ग का टिकट है।
पुलिस द्वारा केस दर्ज करना मोक्ष प्रक्रिया में अनावश्यक दखल माना जाना चाहिए।
🔴 सबूतों का ‘यज्ञ’: फाइल नहीं, पूरा ऑफिस जला दिया
खनिज विभाग में करोड़ों के घोटाले की भनक लगी तो
फाइलें गायब करने की झंझट क्यों?
सीधा समाधान निकाला गया —
बलरामपुर खनिज कार्यालय में आग।
पत्रकार लिखते हैं,
यह अपराध नहीं बल्कि सबूतों को
अग्नि को समर्पित करने का पवित्र अनुष्ठान था।
🔴 फरार आरोपी या घर में पार्टी?
पुलिस रिकॉर्ड में मग्गू सेठ और उनके भाई प्रवीण अग्रवाल फरार हैं।
लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी कहती है।
सूत्रों के मुताबिक,
जून–जुलाई 2025 में दोनों
अपने ही घर में शादी की सालगिरह मना रहे थे,
दावत उड़ रही थी और बिरयानी परोसी जा रही थी।
पुलिस देश भर में तलाश करती रही —
और ‘फरार’ घर पर मेहमाननवाज़ी करते रहे।
🔴 मुफ्त ‘मुक्ति धाम’ योजना
सेठ जी की समाजसेवा भी अद्भुत है।
इतने गहरे कुएं खुदवाए गए कि —
- मवेशी गिरें तो वापस न आएं
- इंसान कूदे तो सवाल ही खत्म
पत्रकार के शब्दों में —
इसे हादसा कहना सेठ जी की महानता का अपमान है।
यह निःशुल्क अंतिम यात्रा सुविधा है।
🔴 आदिवासी ‘कल्याण’ या जमीन हड़प मॉडल?
आदिवासी महिलाओं के नाम पर बेनामी संपत्ति,
पहाड़ी कोरवाओं की जमीन पर कब्ज़ा —
ताकि नाम तो रहे,
लेकिन जमीन नहीं।
तर्क बेहद मानवीय बताया गया है —
“जंगल ही इनके लिए बेहतर है,
शहर की हवा इन्हें सूट नहीं करती।”
🔴 पत्रकारिता का ‘शुद्धिकरण’
जो पत्रकार सेठ जी की महिमा नहीं गाता,
उसके लिए जेल का रास्ता छोटा कर दिया जाता है।
77 साल बाद भी
पत्रकार सुरक्षा कानून नहीं —
और इसी खाली जगह में
डर और दबाव का साम्राज्य खड़ा है।
🔴 क्राइम कुंडली: 2009 से 2025 तक
अपहरण, गैर-इरादतन हत्या,
बलवा, मारपीट, गाली-गलौज —
मुकदमों की सूची इतनी लंबी
कि थाने में नाम मासिक हाज़िरी जैसा दर्ज है।
🔴 सिस्टम का ‘मोय-मोय’
पत्रकार ने व्यंग्य में मांग की है कि —
- राजस्व, खनिज और प्रशासनिक अधिकारियों को राष्ट्रीय सम्मान मिले
- वेतन 100% बढ़ाया जाए
- मग्गू सेठ और प्रवीण अग्रवाल पर लगे सभी आरोप खत्म हों
- उल्टा, सवाल पूछने वाले आदिवासियों और पत्रकारों को जेल भेजा जाए
जो पुलिसकर्मी कार्रवाई की सोचे,
उसे तत्काल बर्खास्त किया जाए —
ताकि ‘व्यवस्था’ निर्बाध चलती रहे।

✍️ निष्कर्ष
अब सवाल सिर्फ इतना है —
क्या यह रिपोर्ट भी
सिस्टम की फाइलों में
मोक्ष पा जाएगी?
या फिर इस बार
कानून,
क्रशर के बाहर
खड़ा नजर आएगा?
— B4News स्पेशल व्यंग्यात्मक रिपोर्ट

