सच दिखाने की सज़ा: मैकल में माफिया का तांडव, पत्रकार पर जानलेवा हमला

सच दिखाने की सज़ा: मैकल में माफिया का तांडव, पत्रकार पर जानलेवा हमला


क्या अब कानून नहीं, बंदूक तय करेगी सच की हद?

B4News | जीपीएम/अमरकंटक | विशेष खोजी रिपोर्ट
दिनांक: 14 जनवरी 2026


मैकल की पहाड़ियों पर माफिया का कब्ज़ा, लोकतंत्र पर सीधा हमला

जब सत्ता मौन साध ले, प्रशासन आंखें मूंद ले और कानून फाइलों में कैद हो जाए—तब माफिया केवल ज़मीन नहीं खोदता, बल्कि लोकतंत्र की नींव को भी छलनी कर देता है।
छत्तीसगढ़–मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित अमरकंटक–मैकल बायोस्फियर रिजर्व आज नदियों की जन्मस्थली या आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि अवैध खनन माफिया के आतंक का प्रतीक बनता जा रहा है।

ताज़ा घटना ने इस सच्चाई को लहू में लिख दिया है।


पत्रकार सुशांत गौतम पर जानलेवा हमला — सच की कीमत लहू से चुकाई

अवैध उत्खनन की सच्चाई सामने लाने वाले पत्रकार सुशांत गौतम पर माफिया ने सुनियोजित तरीके से हमला किया।
यह हमला किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पत्रकारिता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनता के सूचना के अधिकार पर सीधा वार है।


वारदात का पूरा घटनाक्रम: जब सड़क बनी जंग का मैदान

दिनांक: 8 जनवरी 2026
समय: शाम लगभग 6 बजे
स्थान: धनौली क्षेत्र, मैकल पर्वत श्रृंखला

सुशांत गौतम अपनी टीम के साथ अवैध उत्खनन की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर लौट रहे थे। तभी—

  • सामने से एक सफेद कार ने रास्ता रोका
  • एक ओर से भीमकाय हाईवा वाहन
  • पीछे से तीसरी गाड़ी

कुछ ही सेकंड में पत्रकारों को चारों ओर से घेर लिया गया

इसके बाद जो हुआ, वह किसी अपराध फिल्म से कम नहीं था—

  • लोहे की रॉड से ताबड़तोड़ हमला
  • गाड़ियों के शीशे तोड़े गए
  • पत्रकार का चेहरा लहूलुहान कर दिया गया
  • साक्ष्य मिटाने के लिए मोबाइल फोन लूट लिया गया
  • खुलेआम जान से मारने की धमकी

यह हमला पूरी तरह पूर्व नियोजित और संगठित अपराध था।


नामजद आरोपी, फिर भी बेखौफ

इस मामले में FIR क्रमांक 0014/2026 दर्ज की गई है।
नामजद आरोपी हैं—

  • जयप्रकाश शिवदासानी (जेठू)
  • सुधीर बाली
  • लल्लन तिवारी

इन पर भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराएँ लगाई गई हैं—
126(2), 296, 115(2), 351(3), 324(4), 304, 3(5)

ये धाराएँ स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि यह हमला
✔ योजनाबद्ध था
✔ माफिया नेटवर्क से जुड़ा था
✔ पत्रकार की हत्या के इरादे से किया गया

लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है—

👉 क्या रसूखदार आरोपियों तक कानून का हाथ पहुंचेगा?
👉 या फिर यह FIR भी फाइलों में दबकर रह जाएगी?


वरिष्ठ पत्रकारों का तीखा सवाल: क्या शहादत जरूरी है?

वरिष्ठ पत्रकार कुमार जितेंद्र ने इस घटना पर सरकार और सिस्टम को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा—

“क्या हर बार किसी पत्रकार को शहीद होना पड़ेगा, तभी सरकार जागेगी?
क्या छत्तीसगढ़ में माफियाओं को खुली छूट देना अब परंपरा बन चुकी है?”

उन्होंने आगे कहा—

“मग्गू सेठ जैसे चेहरे खुलेआम घूम रहे हैं।
जो पत्रकार उनके चेहरे से नकाब हटाता है, उस पर हमला तय है।
यह केवल पत्रकारों पर नहीं, बल्कि जनता के सूचना के अधिकार पर हमला है।”


प्रशासनिक चुप्पी: लापरवाही या मिलीभगत?

मरवाही वनमंडल की रिपोर्ट खुद गवाही देती है कि—

  • पमरा क्षेत्र में क्रेशर माफिया नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहा है
  • 250 मीटर की अनिवार्य दूरी का खुला उल्लंघन
  • बायोस्फियर रिजर्व में भारी मशीनों का संचालन
  • डायनामाइट धमाकों से पहाड़ों का सीना छलनी

यह सब सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद हो रहा है।

तो सवाल उठना लाज़मी है—

  • वन विभाग की चेतावनी के बाद भी खनन क्यों नहीं रोका गया?
  • क्या अनूपपुर खनिज विभाग की चुप्पी संयोग है?
  • क्या माफिया को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
  • क्या अमरकंटक में प्रशासन केवल दर्शक बन चुका है?

घायल पत्रकार का संकल्प: “कलम झुकेगी नहीं”

जानलेवा हमले के बावजूद सुशांत गौतम का बयान सिस्टम के लिए आईना है—

“यह हमला उनकी बौखलाहट है।
वे सच से डरते हैं।
झूठे केस, धमकियाँ—सब आज़मा रहे हैं,
लेकिन मैकल की बर्बादी का सच अब दबेगा नहीं।”

यह बयान साबित करता है कि
👉 पत्रकार घायल हो सकता है
👉 लेकिन पत्रकारिता आज भी ज़िंदा है


अब आर-पार की लड़ाई

मैकल पर्वत केवल पत्थरों का ढेर नहीं—

  • यही से नर्मदा, सोन और जोहिला जैसी नदियाँ जन्म लेती हैं
  • यह करोड़ों लोगों की आस्था
  • और आने वाली पीढ़ियों की अमानत है

अगर आज एक पत्रकार को सच दिखाने पर सड़क पर घेरकर पीटा जा सकता है,
तो कल कोई भी आम नागरिक सुरक्षित नहीं रहेगा


B4News की मांग

अब समय केवल बयानबाज़ी का नहीं, बल्कि—

✔ आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी
✔ अवैध क्रेशरों पर सीधी कार्रवाई
✔ पत्रकारों की सुरक्षा नीति लागू करने का
✔ और माफिया–प्रशासन गठजोड़ को उजागर करने का है

अन्यथा यह मान लिया जाएगा कि
अमरकंटक में संविधान नहीं, माफिया का समानांतर शासन चल रहा है।


B4News – सच के साथ, सिस्टम के खिलाफ

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