रायपुर | बलरामपुर-रामानुजगंज | विशेष रिपोर्ट
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के बसंतपुर थाना क्षेत्र में थाने से कथित रूप से टायर और धान गायब होने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जहां एक ओर मामले की जांच पूरी नहीं हुई है, वहीं दूसरी ओर खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार पर की गई कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
क्या है पूरा मामला?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बसंतपुर थाना परिसर में जब्त एक वाहन से टायर गायब होने और पुलिस कस्टडी में रखे धान की मात्रा कम पाए जाने की बात सामने आई थी। इस संबंध में स्थानीय स्तर पर खबर प्रकाशित की गई, जिसके बाद मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया।
खबर सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल की स्थिति बनी रही। हालांकि अब तक इस कथित गड़बड़ी की आधिकारिक और विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
पत्रकार की गिरफ्तारी से बढ़ा विवाद
इसी बीच थाना बसंतपुर पुलिस द्वारा पत्रकार रामहरी गुप्ता के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की सूचना जारी की गई। गिरफ्तारी पत्र में उन्हें न्यायालय में पेश किए जाने का उल्लेख किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद पत्रकार संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाए हैं कि यदि थाने से सामान गायब होने की शिकायत थी तो पहले उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी, न कि खबर प्रकाशित करने वाले पर कार्रवाई।
पत्रकार संगठनों की प्रतिक्रिया
स्थानीय पत्रकार संगठनों का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पारदर्शिता लाने और जनहित के मुद्दों को सामने रखने की होती है। उनका आरोप है कि यदि किसी खबर को प्रकाशित करने पर ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव डाल सकता है।
संगठनों ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
स्थानीय लोगों की मांग
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि थाना परिसर से ही सामान गायब हो रहा है, तो यह गंभीर विषय है। लोगों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पुलिस प्रशासन का पक्ष
इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, मामले की कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है।
क्षेत्र में चर्चा जारी
पूरा मामला अब प्रशासनिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर कथित गड़बड़ी की जांच की मांग उठ रही है, तो दूसरी ओर पत्रकार की गिरफ्तारी को लेकर विरोध के स्वर सामने आ रहे हैं।
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इसमें पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।


