भारत ने रचा इतिहास: दुनिया की सबसे ऊंची द्विदिशीय सड़क सुरंग ‘ज़ोजिला टनल’ का हुआ फाइनल ब्रेकथ्रू, लद्दाख से हर मौसम में जुड़ेगा देश

भारत ने रचा इतिहास: दुनिया की सबसे ऊंची द्विदिशीय सड़क सुरंग ‘ज़ोजिला टनल’ का हुआ फाइनल ब्रेकथ्रू, लद्दाख से हर मौसम में जुड़ेगा देश

B4News | विशेष रिपोर्ट

नई दिल्ली/श्रीनगर। भारत ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित द्विदिशीय सड़क सुरंग ज़ोजिला टनल के निर्माण में महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को सुरंग का फाइनल ब्रेकथ्रू (Final Breakthrough) संपन्न होने की जानकारी दी। इस उपलब्धि के साथ हिमालय की दुर्गम पर्वतमालाओं के बीच आर-पार सड़क मार्ग तैयार करने का सपना लगभग साकार हो गया है।


क्या है फाइनल ब्रेकथ्रू?

टनल निर्माण के दौरान पहाड़ के दोनों ओर से एक साथ खुदाई की जाती है। जब दोनों दिशाओं से बनाई गई सुरंगें बीच में जाकर सफलतापूर्वक मिल जाती हैं, तो इस प्रक्रिया को फाइनल ब्रेकथ्रू कहा जाता है।

इसका अर्थ है कि अब पहाड़ के भीतर से एक छोर से दूसरे छोर तक रास्ता पूरी तरह खुल चुका है और परियोजना अपने अंतिम निर्माण चरण में पहुंच गई है।


दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित द्विदिशीय सड़क सुरंग

  • स्थान: जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग और द्रास के बीच
  • लंबाई: लगभग 13.14 किलोमीटर
  • ऊंचाई: लगभग 11,578 फीट
  • परियोजना लागत: करीब ₹6,800 करोड़
  • निर्माण एजेंसी: राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL)

ज़ोजिला टनल को दुनिया की सबसे लंबी और सबसे ऊंचाई पर स्थित बाय-डायरेक्शनल रोड टनल माना जा रहा है।


लद्दाख को मिलेगा सालभर सड़क संपर्क

वर्तमान में ज़ोजिला दर्रा भारी बर्फबारी के कारण हर वर्ष लगभग 5 से 6 महीने तक बंद रहता है। इससे लद्दाख क्षेत्र का देश के अन्य हिस्सों से सड़क संपर्क प्रभावित हो जाता है।

सुरंग बनने के बाद:

✅ श्रीनगर से लेह तक हर मौसम में यातायात संभव होगा।
✅ सेना की रसद और रणनीतिक आपूर्ति तेज होगी।
✅ पर्यटन को नया बढ़ावा मिलेगा।
✅ स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
✅ आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत कार्य आसान होंगे।


सेना के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण

भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान सीमाओं के निकट स्थित लद्दाख क्षेत्र तक पहुंच को मजबूत बनाने में ज़ोजिला टनल की बड़ी भूमिका होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुरंग भारतीय सेना के लिए ऑल-वेदर लॉजिस्टिक कॉरिडोर के रूप में कार्य करेगी, जिससे सैनिकों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सुरक्षित हो जाएगी।


यात्रा समय में होगी भारी कमी

वर्तमान में सोनमर्ग और द्रास के बीच की यात्रा मौसम और सड़क परिस्थितियों के अनुसार कई घंटे लेती है।

ज़ोजिला टनल के चालू होने के बाद:

  • यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
  • बर्फबारी और हिमस्खलन का जोखिम कम होगा।
  • सुरक्षित एवं निर्बाध यातायात सुनिश्चित होगा।

प्रधानमंत्री मोदी के इंफ्रास्ट्रक्चर विजन की बड़ी उपलब्धि

केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों में सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, रेल और सुरंग परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। अटल टनल, चिनाब रेल ब्रिज और अब ज़ोजिला टनल जैसी परियोजनाएं देश की कनेक्टिविटी और सामरिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही हैं।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसे भारतीय इंजीनियरिंग, तकनीकी क्षमता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।


B4News Analysis

ज़ोजिला टनल केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर संपर्क, सामरिक मजबूती, आर्थिक विकास और आधुनिक भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक है। इसके पूर्ण होने के बाद लद्दाख क्षेत्र के विकास की गति कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।


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