छत्तीसगढ़ में पत्रकारों का फूटा आक्रोश: अंबिकापुर से बिलासपुर तक अपर संचालक संजीव तिवारी के खिलाफ सौंपे गए ज्ञापन, CBI-SIT जांच की मांग

छत्तीसगढ़ में पत्रकारों का फूटा आक्रोश: अंबिकापुर से बिलासपुर तक अपर संचालक संजीव तिवारी के खिलाफ सौंपे गए ज्ञापन, CBI-SIT जांच की मांग

पत्रकारों के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर प्रदेशभर में उठी निष्पक्ष जांच की मांग

रायपुर/अंबिकापुर/बिलासपुर, 10 जून 2026। छत्तीसगढ़ में पत्रकारों और मीडिया संगठनों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक संजीव तिवारी के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार, पत्रकारों के उत्पीड़न, लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ रहने तथा पत्रकारों के विरुद्ध कथित रूप से झूठे प्रकरण दर्ज कराने जैसे आरोपों को लेकर अंबिकापुर और बिलासपुर में अलग-अलग ज्ञापन सौंपे गए। दोनों स्थानों पर पत्रकार संगठनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

ज्ञापन में पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), विशेष जांच दल (SIT) तथा आयकर विभाग से कराने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह केवल किसी एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर विषय है।


अंबिकापुर में पत्रकारों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों ने एकत्र होकर कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि हाल ही में एक समाचार पत्र के हॉकर के साथ कथित मारपीट की घटना ने पत्रकार समुदाय को आहत किया है।

पत्रकारों का कहना है कि समाचार वितरण से जुड़े कर्मियों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार न केवल निंदनीय है, बल्कि यह मीडिया व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। ज्ञापन में इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण पत्रकारों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जांच की आवश्यकता बताई गई।


बिलासपुर में भी उठी जांच और कार्रवाई की मांग

अंबिकापुर के बाद बिलासपुर में भी पत्रकारों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि संबंधित अधिकारी के लंबे कार्यकाल, कथित वित्तीय अनियमितताओं तथा अन्य शिकायतों की स्वतंत्र एजेंसियों से जांच कराई जानी चाहिए।

इसके साथ ही पत्रकारों के विरुद्ध कथित रूप से दर्ज झूठे मामलों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई। ज्ञापन में यह स्पष्ट किया गया कि यदि आरोपों में सत्यता पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ज्ञापन की प्रतिलिपि देश और राज्य के विभिन्न संवैधानिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों को भी प्रेषित की गई है, ताकि पूरे मामले पर उच्च स्तर पर संज्ञान लिया जा सके।


पत्रकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल

पत्रकार संगठनों का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका केवल समाचारों के प्रसारण तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन-प्रशासन और जनता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में भी है। ऐसे में यदि पत्रकारों या मीडिया से जुड़े लोगों को प्रताड़ित करने, दबाव बनाने अथवा झूठे मामलों में फंसाने जैसी शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

संगठनों ने यह भी कहा कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों की कार्यशैली की समय-समय पर समीक्षा होना प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए जरूरी है।


प्रमुख मांगें

ज्ञापनों में निम्न प्रमुख मांगें उठाई गईं—

✔ संबंधित अधिकारी के लंबे कार्यकाल की जांच

✔ कथित भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष पड़ताल

✔ पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज कथित झूठे मामलों की स्वतंत्र जांच

✔ CBI, SIT एवं आयकर विभाग जैसी एजेंसियों से जांच

✔ दोषी पाए जाने पर कठोर वैधानिक कार्रवाई

✔ प्रशासनिक पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम


प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यदि शिकायतों पर समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

संगठनों ने यह भी कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा बनाए रखना शासन, प्रशासन और समाज सभी की साझा जिम्मेदारी है तथा इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।


B4News Analysis

अंबिकापुर और बिलासपुर में एक ही दिन सौंपे गए इन ज्ञापनों ने छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और मीडिया की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को फिर से केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें शासन और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि इन आरोपों और मांगों पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है तथा पूरे मामले की सच्चाई किस प्रकार सामने आती है।

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