बालोद। डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम तुएगोंदी स्थित प्रसिद्ध जामड़ी पाटेश्वर धाम में रविवार को सर्व आदिवासी समाज की पारंपरिक देव यात्रा श्रद्धा, आस्था और अनुशासन के माहौल में संपन्न हुई। लंबे समय से विवादों और सामाजिक चर्चाओं के केंद्र में रहे इस धार्मिक स्थल पर इस वर्ष हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कर देव दर्शन किए और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
आस्था और परंपरा का अनूठा संगम
सुबह से ही धाम परिसर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे महिला-पुरुष, युवक-युवतियां तथा बुजुर्ग धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए। मांदर और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच देव यात्रा निकाली गई, जिसमें समाज के विभिन्न गांवों के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।
विवादों के बीच संवेदनशील रहा आयोजन
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से जामड़ी पाटेश्वर धाम भूमि विवाद, वन क्षेत्र में निर्माण कार्यों और धार्मिक स्थल के संरक्षण को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ था। सर्व आदिवासी समाज ने कई बार प्रशासन के समक्ष अपनी धार्मिक आस्था और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई थी। विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए लगातार निगरानी बनाए रखी।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए इस वर्ष की देव यात्रा को प्रशासन ने संवेदनशील श्रेणी में रखा था, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
देव यात्रा के दौरान जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम पूरे समय मुस्तैद रही। आयोजन स्थल, प्रमुख मार्गों तथा आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बैरिकेडिंग, निगरानी व्यवस्था तथा आवागमन पर विशेष नियंत्रण रखा गया। अधिकारियों ने पूरे आयोजन की लगातार मॉनिटरिंग करते हुए यह सुनिश्चित किया कि धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो।
प्रशासन और समाज के बीच बनी सहमति
आयोजन से पहले प्रशासनिक अधिकारियों और सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने पर सहमति बनी। समाज के पदाधिकारियों ने भी श्रद्धालुओं से अनुशासन बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहने की अपील की, जिसका सकारात्मक प्रभाव पूरे आयोजन में देखने को मिला।
मीडिया की आवाजाही पर रहा प्रतिबंध
सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासन ने मीडिया कर्मियों की आवाजाही पर भी कुछ प्रतिबंध लगाए। कई पत्रकारों ने इसे लेकर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि समाचार कवरेज के लिए आयोजन स्थल तक पहुंच आवश्यक थी, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उन्हें निर्धारित सीमा से आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। प्रशासन का कहना था कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया।
शांतिपूर्ण समापन से मिली राहत
तमाम विवादों और संवेदनशील परिस्थितियों के बावजूद जामड़ी पाटेश्वर धाम की देव यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति, समाज का अनुशासन और प्रशासन की सतर्क व्यवस्था ने आयोजन को सफल बनाया। कार्यक्रम के शांतिपूर्ण समापन से स्थानीय प्रशासन, सर्व आदिवासी समाज और क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली।
B4News निष्कर्ष
जामड़ी पाटेश्वर धाम की इस वर्ष की देव यात्रा ने यह साबित किया कि संवाद, सामाजिक सहयोग और प्रभावी प्रशासनिक प्रबंधन के माध्यम से संवेदनशील परिस्थितियों में भी बड़े धार्मिक आयोजनों को सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकता है। आस्था, परंपरा और कानून व्यवस्था के संतुलन का यह आयोजन आने वाले समय के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।


