बिलासपुर। बिलासपुर के कोनी स्थित लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 240 बेड सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और 100 बेड कैंसर केयर अस्पताल के संचालन को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी विजय केशरवानी ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि जनता के टैक्स के पैसे, सरकारी जमीन और सरकारी संसाधनों से तैयार इस अस्पताल को निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के तहत संचालित करने की तैयारी की जा रही है, जबकि सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि इसकी आवश्यकता आखिर क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल अस्पताल संचालन का नहीं बल्कि जनता के स्वास्थ्य अधिकार, सरकारी जवाबदेही और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग से जुड़ा हुआ है।
जनता के पैसे से बना अस्पताल, फिर PPP मॉडल क्यों?

प्रेस वार्ता में विजय केशरवानी ने कहा कि कोनी स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पूरी तरह सरकारी संसाधनों से निर्मित हुआ है। अस्पताल की भूमि राज्य सरकार की है, निर्माण कार्य जनता के टैक्स के पैसे से हुआ है तथा चिकित्सा उपकरण और अन्य संसाधन भी सरकारी हैं।
ऐसे में कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया कि जब निर्माण से लेकर सभी आधारभूत सुविधाएं सरकार ने उपलब्ध कराईं, तो अब अस्पताल के संचालन के लिए निजी भागीदारी (PPP मॉडल) की जरूरत क्यों महसूस हुई।
उन्होंने पूछा कि PPP मॉडल लागू होने के बाद आम मरीजों को ऐसा कौन-सा अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जो सरकारी व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध नहीं कराया जा सकता था। साथ ही गरीब, मजदूर, किसान और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए मुफ्त एवं सुलभ उपचार की क्या गारंटी होगी।
उद्घाटन के डेढ़ साल बाद भी अस्पताल पूरी क्षमता से संचालित नहीं
कांग्रेस ने कहा कि इस अस्पताल का उद्घाटन 29 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। जनता को उम्मीद थी कि बिलासपुर संभाग के मरीजों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि उद्घाटन के लगभग डेढ़ वर्ष बाद भी अस्पताल पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पाया है।
प्रेस वार्ता में निम्न सवाल उठाए गए—
- अस्पताल अपनी पूर्ण क्षमता से क्यों नहीं चल रहा?
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता अभी तक पूरी क्यों नहीं हो सकी?
- गंभीर मरीजों को अब भी अन्य अस्पतालों में रेफर क्यों किया जा रहा है?
कांग्रेस का कहना है कि किसी अस्पताल की सफलता केवल उद्घाटन से नहीं बल्कि मरीजों को मिलने वाली वास्तविक चिकित्सा सुविधाओं से तय होती है।
डॉक्टरों और स्टाफ की कमी पर भी उठाए सवाल
विजय केशरवानी ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल केवल भवन और मशीनों से संचालित नहीं हो सकता। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सक, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मी तथा तकनीकी कर्मचारियों की पर्याप्त उपलब्धता आवश्यक है।
उन्होंने सरकार से पूछा—
- 240 बेड सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एवं 100 बेड कैंसर केयर अस्पताल के लिए कुल कितने पद स्वीकृत किए गए हैं?
- वर्तमान में कितने डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारी कार्यरत हैं?
- उद्घाटन के बाद भी आवश्यक भर्ती प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई?
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने अस्पताल का उद्घाटन तो कर दिया, लेकिन उसे पूर्ण क्षमता से संचालित करने की तैयारी समय पर नहीं की।
सरकारी दस्तावेजों के आधार पर PPP प्रक्रिया पर सवाल
प्रेस वार्ता में कांग्रेस ने दावा किया कि उसके सवाल केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सरकारी दस्तावेजों पर आधारित हैं।
विजय केशरवानी के अनुसार चिकित्सा शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के 10 जून 2026 के पत्र में बिलासपुर स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और कैंसर केयर अस्पताल के संचालन के लिए PPP मॉडल के तहत प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में—
- Revised RFP
- Revised License Agreement
- Financial Modelling and Projections
जैसे दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है।
इसके बाद 26 जून 2026 के विभागीय पत्र में Tender Processing Committee (TPC) तथा निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जानकारी भी दी गई है।
कांग्रेस का दावा है कि इन दस्तावेजों में कंसल्टेंट संस्था KPMG का भी उल्लेख किया गया है।
इसी आधार पर कांग्रेस ने सरकार से पूछा—
- PPP मॉडल लागू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- KPMG को किस उद्देश्य से कंसल्टेंट बनाया गया?
- निजी भागीदारी से आम मरीजों को क्या अतिरिक्त लाभ मिलेगा?
- गरीब मरीजों के मुफ्त उपचार की क्या गारंटी होगी?
PPP मॉडल में मरीजों के अधिकारों पर मांगी स्पष्टता
कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि PPP मॉडल लागू करने से पहले निम्न बिंदुओं पर सार्वजनिक रूप से जानकारी दी जाए—
- अस्पताल का प्रशासनिक नियंत्रण किसके पास रहेगा?
- इलाज की दरें कौन निर्धारित करेगा?
- गरीब मरीजों के लिए मुफ्त या रियायती उपचार की व्यवस्था क्या होगी?
- आयुष्मान भारत योजना के अलावा सामान्य मरीजों को क्या सुविधाएं मिलेंगी?
- किसी प्रकार की शिकायत या लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही किसकी होगी?
- PPP समझौते की प्रमुख शर्तें सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रहीं?
विधायक सुशांत शुक्ला के बयान पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया
प्रेस वार्ता में विजय केशरवानी ने बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के हालिया बयान पर भी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा उठाए गए जनहित के सवालों का उत्तर देने के बजाय पुराने राजनीतिक विषयों की चर्चा की जा रही है, जबकि जनता वर्तमान सरकार से वर्तमान व्यवस्था पर जवाब चाहती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में भाजपा की सरकार है और अस्पताल के संचालन तथा PPP मॉडल से जुड़े सभी निर्णय वर्तमान सरकार के अधीन हैं, इसलिए जवाबदेही भी उसी की बनती है।
उन्होंने विधायक से पूछा कि यदि अस्पताल पूरी तरह सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है, तो PPP मॉडल की आवश्यकता आखिर क्यों महसूस हुई।
दिलीप सिंह जूदेव के नाम से जुड़ी जनभावनाओं का भी किया उल्लेख
कांग्रेस ने कहा कि अस्पताल का नाम स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर रखा गया है, जो जनसेवा और जनता के विश्वास का प्रतीक रहे हैं।
ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अस्पताल वास्तव में गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सुलभ एवं प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराए और यह नाम केवल औपचारिक सम्मान तक सीमित न रहे।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें



प्रेस वार्ता में कांग्रेस ने सरकार के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं—
- लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बने अस्पताल को तत्काल पूर्ण क्षमता से संचालित किया जाए।
- डॉक्टर, नर्सिंग, पैरामेडिकल एवं तकनीकी कर्मचारियों के सभी आवश्यक पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए।
- ICU, कैथ लैब, ऑक्सीजन प्लांट, इमरजेंसी सेवाएं तथा पूर्ण सुविधायुक्त एंबुलेंस व्यवस्था तत्काल शुरू की जाए।
- PPP मॉडल लागू करने से पहले गरीब एवं आम मरीजों के मुफ्त और सुलभ इलाज की लिखित गारंटी दी जाए।
- PPP मॉडल से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज और समझौते की प्रमुख शर्तें सार्वजनिक की जाएं।
कांग्रेस का निष्कर्ष
विजय केशरवानी ने कहा कि यह केवल अस्पताल के संचालन का मामला नहीं बल्कि बिलासपुर की जनता के स्वास्थ्य अधिकार से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे, सरकारी जमीन और सरकारी संसाधनों से बने अस्पताल पर पहला अधिकार जनता का होना चाहिए।
उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि PPP मॉडल से वास्तव में मरीजों को लाभ मिलेगा या केवल संचालन की व्यवस्था बदलेगी। गरीब मरीजों को मुफ्त और सुलभ इलाज मिलेगा या उन्हें निजी व्यवस्था पर निर्भर होना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि बिलासपुर को केवल एक विशाल भवन नहीं बल्कि ऐसा अस्पताल चाहिए जहां आर्थिक स्थिति किसी मरीज के इलाज में बाधा न बने।
B4News Disclaimer
यह समाचार कांग्रेस नेता विजय केशरवानी द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में दिए गए बयानों और प्रस्तुत दस्तावेजों पर आधारित है। PPP मॉडल, अस्पताल संचालन तथा अन्य आरोपों और सवालों पर राज्य सरकार अथवा संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
