थाने में चोर घुसा या थाने का चोर? बसंतपुर थाना से जब्त पिकअप के टायर बदले, धान गायब होने का आरोप; पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल

थाने में चोर घुसा या थाने का चोर? बसंतपुर थाना से जब्त पिकअप के टायर बदले, धान गायब होने का आरोप; पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल

B4NEWS DESK | भारत सम्मान | विशेष रिपोर्ट | बलरामपुर

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के बसंतपुर थाना से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और थाना परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पुलिस कस्टडी में रखे गए एक जब्त पिकअप वाहन से दो नए टायर बदल दिए गए और उसमें लदी धान की बोरियों में भी कमी पाई गई।

इस घटना के बाद न केवल पीड़ित वाहन मालिक ने विरोध जताया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बन गया है कि अगर थाना परिसर में जब्त वाहन और सामान सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की क्या गारंटी है।


क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश निवासी मटुकधारी (पिता – धनुकधारी) अपने पिकअप वाहन क्रमांक UP 64 CT 4056 में कुल 67 बोरी धान लोड कर 27 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ की ओर जा रहे थे।

बताया जा रहा है कि इसी दौरान बसंतपुर थाना स्टाफ ने वाहन का पीछा किया। परिस्थितियों के बीच वाहन को बसंतपुर निवासी राजकुमार गुप्ता के घर के पास खड़ा कर दिया गया, जहां से चालक मौके से फरार हो गया।

इसके बाद पुलिस ने वाहन को अपने कब्जे में ले लिया।


स्थानीय व्यक्ति ने पहुंचाई गाड़ी थाने

स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलिस स्टाफ ने एक स्थानीय व्यक्ति से कहा कि वह वाहन को थाना परिसर तक पहुंचा दे। इसके बाद संबंधित व्यक्ति ने स्वयं पिकअप वाहन को चलाकर बसंतपुर थाना पहुंचाया।

बाद में वाड्रफनगर तहसील के तहसीलदार द्वारा वाहन को जब्त कर विधिवत थाना प्रभारी को सुपुर्द कर दिया गया।

यहीं से वाहन पुलिस कस्टडी में आ गया।


कोर्ट आदेश के बाद खुला बड़ा मामला

दिनांक 24 अप्रैल 2026 को बलरामपुर कलेक्टर कार्यालय द्वारा वाहन रिलीज करने का आदेश जारी किया गया। आदेश लेकर जब वाहन मालिक मटुकधारी बसंतपुर थाना पहुंचे और अपनी गाड़ी देखी, तो वे हैरान रह गए।

उनके अनुसार—

  • गाड़ी के दो नए टायर गायब थे
  • उनकी जगह पुराने और सड़े हुए टायर लगा दिए गए थे
  • कुल 67 बोरी धान में से 4 बोरी कम पाई गई

पीड़ित ने इसे गंभीर लापरवाही ही नहीं, बल्कि सुनियोजित गड़बड़ी बताया है।


मौके पर पत्रकार ने की पुष्टि

मामले की जानकारी मिलने पर पत्रकार रामहरी गुप्ता मौके पर पहुंचे और वाहन की स्थिति का निरीक्षण किया।

उन्होंने भी पाया कि—

  • पिकअप वाहन अपेक्षाकृत नया था
  • कुछ टायर कंपनी के ओरिजिनल थे
  • जबकि दो टायर स्पष्ट रूप से बदले हुए और पुराने दिखाई दे रहे थे

इससे टायर बदलने की आशंका और मजबूत हो गई।


पीड़ित का सीधा सवाल – “जब थाना ही सुरक्षित नहीं…”

वाहन मालिक मटुकधारी ने पूरे मामले में गंभीर सवाल उठाते हुए कहा—

“जब थाना ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे होगी?”

उन्होंने साफ कहा कि जब तक उनके दोनों नए टायर वापस नहीं लगाए जाते और चार बोरी धान की भरपाई नहीं होती, तब तक वे वाहन थाने से नहीं ले जाएंगे।

उनका कहना है कि पुलिस कस्टडी में वाहन सुरक्षित रहना चाहिए था, लेकिन यहां उल्टा नुकसान हो गया।


पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया

मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक (SP) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कई बार फोन करने के बावजूद संपर्क नहीं हो सका।

इसके बाद मामले की जानकारी विश्व दीपक त्रिपाठी को दी गई।

डीएसपी ने पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।

हालांकि अब तक इस मामले में किसी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी पर कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है।


उठते बड़े सवाल

इस घटना ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं—

  • क्या थानों में जब्त वाहन और सामान भी सुरक्षित नहीं हैं?
  • क्या पुलिस कस्टडी में चोरी संभव है?
  • या यह किसी अंदरूनी मिलीभगत का मामला है?
  • क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
  • क्या जब्त संपत्तियों की निगरानी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है?

इन सवालों का जवाब अब प्रशासन और पुलिस विभाग को देना होगा।


दरिमा थाना में भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

यह पहली बार नहीं है जब थाना परिसर से टायर चोरी या पार्ट्स गायब होने का मामला सामने आया हो।

इससे पहले सरगुजा जिले के दरिमा थाना में भी पुलिस हिरासत में रखे गए वाहन से टायर चोरी का गंभीर मामला सामने आ चुका है।


दरिमा थाना का मामला क्या था?

दरिमा थाना में एक प्रकरण के तहत एक ट्रैक्टर को जब्त कर थाना परिसर में खड़ा किया गया था। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 304A (लापरवाही से मृत्यु) से जुड़ा था।

आरोप लगा कि—

  • ट्रैक्टर के नए टायर चोरी कर लिए गए
  • अन्य महत्वपूर्ण पार्ट्स भी गायब हुए
  • इस पूरे मामले में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई

बताया गया कि पुलिसकर्मियों ने एक स्थानीय व्यापारी से टायर और पार्ट्स बेचने का सौदा भी किया था।


कौन थे आरोपी?

जांच में जिन नामों का खुलासा हुआ, उनमें शामिल थे—

  • प्रधान आरक्षक संतोष कुमार गुप्ता
  • आरक्षक जगेश्वर बघेल

इन दोनों पर थाने से ही टायर चोरी कर बेचने का आरोप लगा था।


क्या हुई थी कार्रवाई?

मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने विभागीय जांच कराई और दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की।

कार्रवाई इस प्रकार हुई—

प्रधान आरक्षक संतोष कुमार गुप्ता

इन्हें डिमोट (Demote) कर आरक्षक (Constable) बना दिया गया।

आरक्षक जगेश्वर बघेल

इन्हें न्यूनतम वेतनमान पर आरक्षक पद पर ही रखने का दंड दिया गया।

इस कार्रवाई ने पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया था।


क्या बसंतपुर में फिर दोहराया गया वही पैटर्न?

अब बलरामपुर जिले के बसंतपुर थाना में सामने आया ताजा मामला कहीं न कहीं उसी तरह की लापरवाही या संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

लगातार ऐसे मामलों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि—

  • थानों में जब्त वाहनों की सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है
  • निगरानी और जवाबदेही में गंभीर सुधार की जरूरत है
  • आंतरिक जांच व्यवस्था को मजबूत करना होगा
  • दोषियों पर त्वरित और सार्वजनिक कार्रवाई जरूरी है

यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो जनता का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होना तय है।


अब सबकी नजर प्रशासन पर

बसंतपुर थाना का यह मामला अब केवल टायर और धान चोरी का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल बन चुका है।

जनता अब यह देखना चाहती है कि—

क्या इस बार भी मामला सिर्फ जांच तक सीमित रहेगा,
या वास्तव में दोषियों पर ठोस और उदाहरणात्मक कार्रवाई होगी?

फिलहाल पूरे जिले की नजर प्रशासन और पुलिस विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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