बिलासपुर | B4News
बिलासपुर जिले की तारबाहर पुलिस ने म्यूल (Mule) बैंक खातों के माध्यम से संचालित साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे दो आरोपियों को रायपुर से गिरफ्तार किया है। इससे पहले इसी मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। ताजा गिरफ्तारी के साथ इस प्रकरण में अब तक कुल छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त दो मोबाइल फोन भी बरामद कर जप्त किए हैं। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
तारबाहर थाना में अपराध क्रमांक 155/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 317(4), 112 एवं 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, 13 मई 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की व्यापार विहार शाखा, बिलासपुर के आसपास एक व्यक्ति बैंक आने वाले लोगों को उनके बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले कमीशन देने का लालच दे रहा है। इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया जा रहा था।
सूचना मिलते ही पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया और तत्काल कार्रवाई शुरू की गई।
पहले ही हो चुकी थी चार आरोपियों की गिरफ्तारी
प्रकरण की शुरुआती जांच में पुलिस ने चार आरोपियों—
- दीपेश कुमार गुप्ता
- नवनीत मिश्रा
- ऋषभ साहू
- राजा घरानी
को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था। इसके बाद मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी थी।
तकनीकी जांच से मिला सुराग
विवेचना के दौरान साइबर सेल द्वारा उपलब्ध कराए गए तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल विश्लेषण के आधार पर पुलिस को पता चला कि मामले के दो फरार आरोपी रायपुर में छिपे हुए हैं।
इसके बाद पुलिस टीम तत्काल रायपुर रवाना हुई और योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान इस प्रकार है—

1. अमीर उर्फ अमीरुद्दीन (29 वर्ष)
पिता – वकील अहमद
निवासी – हाउस नंबर 36, सतीश किराना दुकान के पास, मौदहापारा, रायपुर।
2. मोहम्मद अल्मास गाजी (24 वर्ष)
पिता – मोहम्मद परवेज गाजी
निवासी – जेठा बाड़ी, वृंदावन कॉम्प्लेक्स, मौदहापारा, रायपुर।
पूछताछ में किया अहम खुलासा
पुलिस पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे कमीशन के आधार पर लोगों के बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा ऑनलाइन धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने और उसे निकालने के लिए किया जाता था।
इस तरह के बैंक खातों को साइबर अपराध की भाषा में ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ कहा जाता है, जिनका उपयोग अपराधी अपनी वास्तविक पहचान छिपाने और अवैध धन के लेन-देन के लिए करते हैं।
दो मोबाइल फोन बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन बरामद कर जब्त किए हैं। मोबाइल फोन की डिजिटल जांच से नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
पूरी कार्रवाई पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह (IPS) के निर्देश पर की गई।
अभियान का संचालन—
- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) पंकज कुमार पटेल,
- नगर पुलिस अधीक्षक सिटी कोतवाली गगन कुमार (IPS),
- तथा थाना प्रभारी तारबाहर निरीक्षक रविन्द्र अनंत
के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में किया गया।
साइबर अपराध में कैसे इस्तेमाल होते हैं म्यूल बैंक खाते?
साइबर अपराधी अक्सर ऐसे लोगों की तलाश करते हैं जो कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता उपलब्ध करा दें। इन खातों में ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम जमा कराई जाती है और फिर तुरंत दूसरे खातों में भेज दी जाती है या नकद निकाल ली जाती है। इससे असली अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल साइबर ठग ही नहीं, बल्कि अपना बैंक खाता उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति भी कानूनन अपराध का भागीदार माना जाता है और उसके खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई की जाती है।
पुलिस की अपील
बिलासपुर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर या इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा किसी को भी कमीशन या लालच में उपलब्ध न कराएं। ऐसा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
साथ ही यदि किसी को इस प्रकार की गतिविधि की जानकारी मिले तो तत्काल नजदीकी पुलिस थाना या साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दें।

